सोमवार, 2 नवंबर 2020

श्रीमद्भागवत गीता

स एवायं मया तेऽद्य योगः प्रोक्तः पुरातनः।
 भक्तोऽसि मे सखा चेति रहस्यं ह्येतदुत्तमम्‌॥

तू मेरा भक्त और प्रिय सखा है, इसलिए वही यह पुरातन योग आज मैंने तुझको कहा है क्योंकि यह बड़ा ही उत्तम रहस्य है अर्थात गुप्त रखने योग्य विषय है
 ॥3॥

~ श्लोक 3 - अध्याय 4 - दिव्य ज्ञान

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