सोमवार, 16 नवंबर 2020

श्रीमद्भागवत गीता

न मां कर्माणि लिम्पन्ति न मे कर्मफले स्पृहा।
 इति मां योऽभिजानाति कर्मभिर्न स बध्यते॥

कर्मों के फल में मेरी स्पृहा नहीं है, इसलिए मुझे कर्म लिप्त नहीं करते- इस प्रकार जो मुझे तत्व से जान लेता है, वह भी कर्मों से नहीं बँधता
 ॥14॥

~ श्लोक 14 - अध्याय 4 - दिव्य ज्ञान

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें