गुरुवार, 30 अप्रैल 2020

श्रीमद्भागवत गीता

कर्मजं बुद्धियुक्ता हि फलं त्यक्त्वा मनीषिणः।
 जन्मबन्धविनिर्मुक्ताः पदं गच्छन्त्यनामयम्‌॥

क्योंकि समबुद्धि से युक्त ज्ञानीजन कर्मों से उत्पन्न होने वाले फल को त्यागकर जन्मरूप बंधन से मुक्त हो निर्विकार परम पद को प्राप्त हो जाते हैं
 ॥51॥

~ श्लोक 51 - अध्याय 2 

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